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JDU Politics: जेडीयू प्रदेश कमेटी पर घमासान, नाराज नेता मिलने पहुंचे, नीतीश कुमार की तबीयत बिगड़ने से आवास का गेट बंद

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Alam Ki Khabar: जेडीयू की नई प्रदेश कमेटी के गठन के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ गया है। नाराज नेता शिकायत लेकर नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे, लेकिन तबीयत खराब होने की सूचना के बीच आवास का गेट बंद मिला। पार्टी के भीतर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

पटना, 10 जुलाई। आलम की खबर: जनता दल (यूनाइटेड) की नई प्रदेश कमेटी के गठन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। प्रदेश कमेटी की घोषणा के बाद कई नेताओं ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को नाराज नेताओं का एक समूह अपनी शिकायत लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचा, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका। इस दौरान यह जानकारी दी गई कि नीतीश कुमार की तबीयत ठीक नहीं है, जिसके कारण मुलाकात संभव नहीं होगी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

पार्टी के असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि नई प्रदेश कमेटी के गठन में लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले कई नेताओं की उपेक्षा की गई है, जबकि कुछ ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिन पर पहले से पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। नाराज नेताओं का कहना है कि वे इन्हीं मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे।

इस बीच जेडीयू के भीतर गुरुवार को भी तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। पार्टी के एक निवर्तमान महासचिव और एमएलसी संजय गांधी के बीच कथित तौर पर तीखी बहस हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि सुरक्षा कर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा। बाद में निवर्तमान महासचिव धीरज कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में बहस होने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने विवाद के अन्य पहलुओं पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

नई प्रदेश कमेटी को लेकर असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे लोगों को जगह दी गई है जिनकी भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को इस बार कमेटी से बाहर कर दिया गया। हालांकि इन आरोपों पर पार्टी नेतृत्व की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने हाल ही में नई प्रदेश कमेटी की घोषणा की थी, जिसमें 12 प्रदेश उपाध्यक्ष, 38 प्रदेश महासचिव और 74 प्रदेश सचिव बनाए गए हैं। कमेटी के ऐलान के बाद से ही पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकता है, यदि इसे समय रहते नहीं सुलझाया गया।

संगठन की एकजुटता हर राजनीतिक दल के लिए अहम

किसी भी राजनीतिक दल में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन यदि असंतोष सार्वजनिक रूप ले ले तो उसका असर चुनावी तैयारी और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में संवाद और संगठनात्मक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना किसी भी दल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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